भोपाल में एक पत्रकार के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर मीडिया जगत में खलबली

भोपाल में एक पत्रकार के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर मीडिया जगत में खलबली

भोपाल: मध्य प्रदेश में बुधवार को कोरोना वायरस के संक्रमण के छह नए मामलों की पुष्टि होने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या बढ़कर 15 हो गई। वहीं, इनमें से 65 वर्षीय उज्जैन की महिला की इन्दौर में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। कोरोना संक्रमितों में भोपाल के एक पत्रकार के भी शामिल होने की जानकारी से यहां मीडियाकर्मियों में दशहत है क्योंकि उक्त पत्रकार 20 मार्च को मुख्यमंत्री निवास में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की पत्रकार वार्ता में भी मौजूद था। कमलनाथ की पत्रकार वार्ता के बाद यह पत्रकार 20 मार्च को प्रदेश विधानसभा में भी मौजूद था। 

भोपाल के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) सुधीर देहरिया ने बताया कि जो भी लोग संक्रमित पत्रकार के संपर्क में थे उनको सलाह दी जाती है कि वह 14 दिनों के लिए घर में स्वयं को पृथक कर लें तथा अगले कुछ दिनों में उन्हें यदि खांसी, ठंड और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो कोरोना नियंत्रण कक्ष में संपर्क करें। 

देहरिया ने बताया कि भोपाल के कोरोना पीड़ित पत्रकार की 26 वर्षीय बेटी के भी कोरोना से संक्रमित होने की पहले ही पुष्टि हो चुकी है। युवती 18 मार्च को लंदन से भोपाल आई थी। उन्होंने बताया कि पिता-पुत्री दोनों का इलाज भोपाल एम्स में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लंदन से लौटने के बाद यह युवती दो दिन तक अपने परिवार के साथ रही और 20 मार्च को आई जांच रिपोर्ट में उसके संक्रमित होने की पुष्टि हुई। 

उन्होंने बताया कि हालांकि युवती के परिवार में उसकी मां, भाई और घर में काम करने वाले अन्य लोगों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, पत्रकार के संक्रमित होने की पुष्टि के बाद से भोपाल में मीडियाकर्मियों में घबराहट है। एक राष्ट्रीय दैनिक से जुड़े भोपाल के एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, ‘‘कमलनाथ की पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के विधायक, नेता, सरकारी अधिकारी और बड़ी तादाद में पत्रकार मौजूद थे। मैं भी उनसे मिला था। हम सभी अब दहशत में हैं। उन्हें :संक्रमित पत्रकार: इस पत्रकार वार्ता में भाग नहीं लेना चाहिए था। जब वह जानते थे कि उनकी बेटी विदेश यात्रा से वापस आई है।’’ 

उन्होंने कहा कि पत्रकार वार्ता के दौरान संबंधित पत्रकार से मिलने वाले अन्य पत्रकारों को अब घबराने के बजाय अन्य लोगों से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए। वहीं जर्नलिस्टस क्लब के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया, ‘‘यह बहुत ही गैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार है। केन्द्र सरकार ने बार बार विदेश यात्रा करने वाले लोगों और उनसे संपर्क में आने वाले लोगों को कोरोना वायरस को लेकर सलाह जारी की। इसके बावजूद ऐसा व्यक्ति इतनी अहम जगह पर बड़ी पत्रकार वार्ता में मौजूद था।’’ उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को ऐसे लोगों को पहले ही अलग रखना चाहिए क्योंकि प्रशासन को विदेश से आने वाले लोगों के बारे में पूरी जानकारी होती है। 

इसबीच, प्रदेश के जनसंपर्क विभाग के आयुक्त पी नरहरी ने एक संदेश में पत्रकारों से कहा कि जो भी पत्रकार कमलनाथ की पत्रकार वार्ता में उपस्थित थे उन्हें स्वयं को तुरंत ही पृथक (क्वारन्टीन) कर लेना चाहिए। नरहरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वायरस के कोई भी लक्षण पाए जाने पर इसकी जांच कराई जा सकती है। वहीं, प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने लिखित बयान में स्वयं को पृथक करने की जानकारी दी है। 

बयान में सिंह ने कहा, ‘‘ज्ञात हुआ है कि एक पत्रकार जिनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वे 20 मार्च 2020 को विधानसभा परिसर में आए थे। अत: इन पत्रकार के संपर्क में आये उन सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य व्यक्तियों से अनुरोध है कि वे सभी अपने आपको घर पर ही पृथक कर लें तथा आवश्यकतानुसार जांच एवं चिकित्सीय सलाह लेने का कष्ट करें। मेरे द्वारा भी घर को सेनेटाइज कराकर खुद को पृथक कर लिया गया है।’’ 

हालांकि कमलनाथ की पत्रकार वार्ता में मौजूद किसी भी पत्रकार ने अब तक कोरोना वायरस संक्रमण का लक्षण नहीं बताया है। डॉक्टरों ने कहा कि वायरस के लक्षण सतह पर आने में एक सप्ताह या उससे अधिक भी लग सकता है। भोपाल में एक पत्रकार और इन्दौर के पांच मरीजों को मिलाकर बुधवार को प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के छह मामले सामने आए। इनमें से उज्जैन निवासी महिला (65) की इन्दौर के अस्पताल में शाम को इलाज के दौरान मौत हो गई। इस प्रकार बुधवार शाम तक प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के जबलपुर में छह, इन्दौर में पांच, भोपाल में दो तथा शिवपुरी और ग्वालियर में एक-एक मामला सामने आया है।



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